महदवियत व हुकूमत ->


महदी (अ) रुक्ने शदीद हैं

 

यनाबीउल मवद्दत में महज्जह की किताब से इस तरह रिवायत की गई है रावी बयान करता है कि हज़रत लूत अपनी क़ौम से इस क़ौल का मतलब
لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَى رُكْنٍ شَدِيدٍ
 (सूरह हूद आयत 80)

इसके अलावा कुछ और नही था कि उन्होने महदी की क़ुव्वत और आपके अंसार की शुजाअत की तमन्ना की थी और यही लोग रुक्ने शदीद हैं। क़ायम के असहाब से एक मर्द की ताक़त चालीस लोगों के बराबर होगी और उनके मर्दों का दिल फ़ौलाद

 

यनाबीउल मवद्दत में महज्जह की किताब से इस तरह रिवायत की गई है रावी बयान करता है कि हज़रत लूत अपनी क़ौम से इस क़ौल का मतलब
لَوْ أَنَّ لِي بِكُمْ قُوَّةً أَوْ آوِي إِلَى رُكْنٍ شَدِيدٍ
 (सूरह हूद आयत 80)
इसके अलावा कुछ और नही था कि उन्होने महदी की क़ुव्वत और आपके अंसार की शुजाअत की तमन्ना की थी और यही लोग रुक्ने शदीद हैं। क़ायम के असहाब से एक मर्द की ताक़त चालीस लोगों के बराबर होगी और उनके मर्दों का दिल फ़ौलाद से ज़्यादा सख़्त होगा। पहाड़ों से गुज़रेगें, पहाड़ टुकड़े टुकड़े हो जायेगा। और वह अपनी तलवारों को उस वक़्त तक म्यान में नही रखेगें जब तक कि ख़ुदावंदे आलम राज़ी न हो जाये।
यनाबीउल मवद्दत में हाफ़िज़ अलकंदूज़ी अलहन्फ़ी, अबू जाफ़र(अ) से रिवायत करते हैं कि इमाम ने फ़रमाया: कि ख़ुदावंदे आलम हमारे चाहने वालों के दिलों में रोअब पैदा कर देगा लेकिन जब हमारा क़ायम ज़हूर करेगा उस वक़्त हमारे चाहने वाले शेर से ज़्यादा बहादुर होगें और तलवारों से गुज़र जायेगें।
सबान ने असआफ़ुर राग़ेबीन मेंमहदी(अ) के ज़हूर से मुतअल्लिक़ बअज़ आसार का तज़किरा इस तरह किया: आपका ज़हूर ताक़ सालों मसलन एक या तीन, पाँच या सात में होगा। मक्के में आपकी बैअत करने के बाद आपका लश्कर कूफ़े की जानिब रवाना होगा। उसके बाद मुख़्तलिफ़ शहरों में तीतर बीतर हो जायेगा।
यनाबीउल मवद्दत में अल्लाह के इस क़ौल
یا یها الذین آمنوا اصبروا و صابروا و رابطوا
की तफ़सीर इस तरह की गई है:
اصبروا و صابرواयानी अपने दुश्मन की अज़ीय्यत पर सब्र करो,
و رابطواऔर अपने इमाम महदी(अ) से वाबस्ता रहो।
(सलमा शाफ़ेई) अक़्दुद दुरर में अबी अब्दिल्लाहिल हुसैन इब्ने अली(अ) से रिवायत करता है, आपने इरशाद फ़रमाया: जब मशरिक़ का जानिब में तीन रोज़ या सात रोज़ आग देखो पस समझ लेना कि वही आले मुहम्मद (अ) के ज़हूर का ज़माना है। इन्शाँ अल्लाह।
फिर एक मुनादी आसमान से महदी के नाम से नेदा करेगा जिसको मशरिक़ व मग़रिब के तमाम लोग सुनेगें। यहाँ तक कि गहरी नींद और नीम बेदारी की हालत में सोने वाले भी उस आवाज़ को सुन लेगें। गहरी नींद में सोने वाला आवाज़ सुनते ही बेदार हो जायेगा और नीम ख़्वाबी में मुब्तला शख़्स उठकर बैठ जायेगा और बैठा हुआ खड़ा हो जायेगा और दौड़ पड़ेगा। ख़ुदा वंदे आलम उस आवाज़ को सुनकर जवाब देने पर अपनी रहमत नाज़िल फ़रमाएगा क्यो कि यह आवाज़ रुहुल अमीन जिबरईल (अ) की होगी।
महदी () कीहुकूमतपाँचवीहोगी
इब्ने हजर शाफ़ेई की सवाएक़े मोहरेक़ा में अबिल क़ासिम तबरानी के वास्ते से आँ हज़रत(स) से रिवायत करता है आँ हज़रत ने फ़रमाया: मेरे बाद अंक़रीब मेरे ख़ुलाफ़ा होगें, फिर उमारा होगें फिर मुलूक होगें, फिर जबाबेरह (यानी ज़ालिम बादशाह होगें) फिर मेरे अहले बैत से एक शख़्स ज़हूर करेगा जो ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगा जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।[27]
दज्जाल केमअना
सलमा की अक़दुद दुरर में अबी अब्बास अहमद इब्ने यहिया इब्ने तग़लिब से इस तरह बयान किया गया अबुल अब्बास बयान करता है दज्जाल का नाम उसके धोके और फ़रेबकारी की वजह से है। मसलन
و جلت العبیر اذا طلبة بالفطران
यानी जब ऊंट की मालिश रोग़नी माद्दे से करते हो, उस वक़्त इस जुमले का इस्तेमाल[28] करते हैं।
इब्ने सबाग़(अलमालिकी) की फ़ुसुलुल मुहिम्मा में अबी जाफ़र से रिवायत की जिसमें आपने फ़रमाया: जिस वक़्त ज़हूर करेगें कूफ़े की जानिब रवाना होगें वहाँ मसाजिद को वसीअ और रास्तों में निकले हुए परनालों को बंद कर देगें। कोई बिदअत ऐसी होगी मगर आप उसका क़िला क़मअ फ़रमायेगें और कोई भी सुन्नत ऐसी बाक़ी न रह जायेगी मगर उसको क़ायम फ़रमायेगें, क़ुस्तुन्तुन्या, चीन और दैलम के पहाड़ों को फ़तह करेगें।[29]
यनाबीउल मवद्दत में हाफ़िज़ क़ंदूज़ी(अलहनफ़ी) ने अमीरुल मोमेनीन अली इब्ने अबी तालिब(अ) से रिवायत की, अमीरुल मोमेनीन फ़रमाते हैं: आँ हज़रत(स) ने फ़रमाया: अफ़ज़ल तरीन इबादत क़शाइश का इन्तेज़ार है।
मुअल्लिफ़े किताब हाफ़िज़ अलक़ंदूज़ी बयान करते हैं हदीस से महदी(अ) के ज़हूर की कशाकश मुराद है।[30]
महदीकाज़िक्रतमामकिताबोंमेंमौजूदहै
सलमा की अक़दुद दुरर में उमर बिन मुक़री की सुनन से और हाफ़िज़ नईम बिन हम्माद ने राहिबों की किताब से इस तरह रिवायत की है, वह बयान करता है: मैंने महदी का तज़किरा अम्बिया की कुतुब में देखा है, आपके हुक्म में किसी क़िस्म का ज़ुल्म और तशद्दुद नही है।)[31]
सुकूनइतमीनान:
अक़दुद दुरर में हरस बिन मुग़ीरा नज़री से रिवायत की गयी वह बयान करता है मैंने अबी अब्दिल्ला बिन अली से अर्ज़ की आक़ा ए महदी को किस तरह से पहचाना जायेगा? हज़रत ने फ़रमाया:
بالسکینة والوقار
सुकून और इतमीनाने नफ़्स के ज़रीये पहचाना जायेगा।[32]
अक़दुद दुरर में ताऊस की सनद से इस तरह रिवायत की गयी: महदी (अ) मज़दूरों की सख़्त निगरानी करेगें, माल की सख़ावत फ़रमायेगें और मिसकीनों पर रहम करेगें।
अक़दुद दुरर में नईम बिन हम्माद के वास्ते से अबी रुमीयतः से इस तरह रिवायत की गयी अबी रुमीयतः बयान करता है कि महदी(अ) मिसकीनों को अमवाल का बेहतरीन हिस्सा अता करेंगें। [33]
अक़दुद दुरर में हुसैन बिन अली की सनद से इस तरह रिवायत की गयी जिस वक़्त इमाम महदी (अ) ज़हूर फ़रमायेगें उस वक़्त आपके और अरब व क़ुरैश के दरमियान सिर्फ़ तलवार होगी, और उन लोगों को आपके ज़हूर की जल्दी न होगी।(ख़ुदा बेहतर जानता है)
आपका लिबास बहुत सादा और खाना जौ पर मुन्हसिर और जहा कहीं आप मौजूद होगें मौत आपकी तलवार के साये में होगी।[34]
यहूदीयतफ़नाहोजायेगी
अक़दुद दुररमें सुलेमान बिन ईसा की सनद से इस तरह रिवायत की गयी सुलेमान बिन ईसा बयान करता है मुझ से लोगों ने बयान किया कि महदी(अ) के हाथों पर बुहैरा ए तीबरीत से ताबूते सकीना ज़ाहिर होगा। आप उसको बुलंद फ़रमा कर बैतुल मुक़द्दस के सामने रख देगें। यह देख कर यहूदी आप पर ईमान ले आयेगें।
अक़दुद दुरर में इस तरह वारिद हुआ है कि बअज़ रिवायात में बयान किया गया है कि आपका नाम(महदी) इस वजह से क़रार पाया कि आप तौरेत की जानिब हिदायत फ़रमायेगें और उसको मुल्के शाम के पहाड़ो पर बरामद फ़रमायेगें। और यहूदीयों की उसकी जानिब हिदायत करेगें। चुनाँचे उस वक़्त यहूदीयों की एक बड़ी जमाअत इस्लाम क़बूल कर लेगी।
और मदाएनी अपनी किताब सुनन में बयान किया है कि आपकी नाम महदी इस सबब से क़रार पाया कि आप मुल्के शाम की पहाड़ीयों की जानिब लोगों को हिदायत फ़रमायेगें ताकि उससे अहले तौरेत को निकाला जाये तो जिसके ज़रीये आप यहूदीयों पर इतमामे हुज्जत तमाम फ़रमायेगें, चुनाँचे आप के ज़रीये बहुत से यहूदी इस्लाम क़बूल करेगें।
सबान असअफ़ुर राग़ेबीन में इस तरह बयान करता है कि महदी(अ) इनताकिया के ग़ार से ताबूते सकीना और तौरेत की किताबें मुल्के शाम के पहाड़ों से निकालेगें जिसके ज़रीये यहूदीयों पर इतमामे हुज्जत फ़रमायेगें, जिनमें से बहुत से यहूदी इस्लाम क़बूल करेगें।
दुनियामेंमसीहीयतबाक़ीरहेगी
यनाबीउल मवद्दत में हाफ़िज़ कंदूज़ी अबू हुरैरा से रिवायत करते हैं, वह बयान करता है रसूलल्लाह(स) ने फ़रमाया:
ولله لینزلن بمریم حکما عادلا فلیکسرن الصلیب و لیقتلن الخنزیر و الیصعن الجزیة و لیترکن الفلاس فلا سعی الیها ولتذهن الشحنا ء و تلتباغض و التحسد
तर्जुमाहाशिया: ऐन मुमकिन है कि हदीसे मज़कूरा का तर्जुमा इस तरह हो कि ईसा बिन मरियम नाज़िल होगें। (इसलिये कि हज़रत ईसा की जानिब मंसूब शुदा शरीयत के ज़वाल के बयान में हदीस मज़कूर वारिद है।)
(فلیکسرن الصلیب) ईसा(अ) सलीब को तोड़ डालेगें इस तरह ईसाईयों पर सलीब का बेबुनियाद होना साबित हो जायेगा। और ख़िन्ज़ीर को क़त्ल करेंगें। इसलिये कि ख़िन्ज़ीर इस्लाम में हराम है। और मसीही उसी वक़्त इस्लाम क़बूल करे लेगें और उस रोज़ के बाद ख़िन्ज़ीर का इस्तेमाल नही होगा। इस लिये कि यहूद व नसारा में से कोई भी अपने दीन पर बाक़ी न रहेगा। कनीसा से नाच गाने का सिलसिला ख़त्म हो जायेगा और कोई भी उसकी जानिब मुतवज्जे न होगा और कोई शख़्स किसी दूसरे से बुग़्ज़ व हसद नही करेगा इसलिये कि उस वक़्त तमाम दुनिया(ईमान के) एक ही रास्ते पर गामज़न होगी। जैसा कि क़ुरआने मजीद में ख़ुदा वंदे आलम ने इरशाद फ़रमाया:
لیظهره علی الدین کله
सलमा शाफ़ेई की अक़्दुद दुरर में अली बिनअबीतालिब(अ)की सनद से इस तरह रिवायत की गयी हज़रत ने इरशाद फ़रमाया: महदी(अ) तमाम मुल्कों में अपने अहकाम रवाना फ़रमायेगें। जो लोगों के दरमियान अदल व इंसाफ़ करेगें। आपके दौरे हुकुमत में बकरी और भेड़िया एक चरागाह में खायेगें, बच्चे साँप और बिच्छू से खेलेगें जिनसे ज़रा भी नुक़सान न होगा। एक मुद बोया जायेगा और सात मुद पैदावार होगी।
ज़नाकारी, शराबखोरी और सूदख़ोरी ख़त्म हो जायेगी। लोगों का रुजहान शरीअत, दीन, इबादात, तवाफ़ व जमाअत की तरफ़ होगा। और लोग बहुत ज़्यादा उमरे बजा लायेगें। अमानतदारी का हक़ अदा करेगें। दरख़्तों के भलों में इज़ाफ़ा और बरकतो की ज़्यादती होगी। बुरे लोग ख़त्म हो जायेगें और नेकूकार बाक़ी रहेगें।
 

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